भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर ब्रज की धरती पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूब चुकी है। मथुरा से लेकर वृंदावन तक मंदिरों में भक्तों की कतारें लगी हैं। गलियां राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज रही हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु कान्हा के प्राकट्य के साक्षी बनने के लिए मथुरा पहुंच रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान, ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, राधारमण मंदिर समेत ब्रज के प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। शुक्रवार की सुबह से ही मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया।
वृंदावन स्थित ठाकुर राधारमणलाल मंदिर में भगवान का पंचगव्य से महाभिषेक किया गया। दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से तैयार पंचगव्य से ठाकुरजी का अभिषेक किया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भगवान के दर्शन और अभिषेक की एक झलक पाने के लिए भक्तों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
सीएम योगी ने किए गर्भगृह के दर्शन
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मथुरा-वृंदावन पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मंदिर पहुंचकर गर्भगृह के दर्शन किए और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने संतों और श्रद्धालुओं से भी मुलाकात की। सीएम के दौरे को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। मुख्यमंत्री के आगमन के दौरान पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। प्रमुख मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई है। श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग और प्रवेश-निकास के अलग रास्ते बनाए गए हैं।
आधी रात को होगा कान्हा का प्राकट्य
जन्माष्टमी का सबसे बड़ा आयोजन रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर होगा। मान्यता है कि भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। इसी परंपरा के अनुसार रात 12 बजे मंदिरों में शंख और घंटियों की गूंज के बीच कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। जन्म के बाद भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक होगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दूध, दही, घी, शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद बाल गोपाल की विशेष आरती होगी। मंदिरों में इस पल को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात तक इंतजार करेंगे।
दुल्हन की तरह सजी मथुरा-वृंदावन की गलियां
जन्माष्टमी को लेकर मथुरा और वृंदावन का नजारा देखते ही बन रहा है। मंदिरों, प्रमुख बाजारों और रास्तों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। कहीं फूलों से आकर्षक सजावट की गई है तो कहीं भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी लीलाओं पर आधारित झांकियां तैयार की गई हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में भी विशेष सजावट की गई है। मंदिर परिसर में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के आसपास का इलाका भी जन्माष्टमी की रौनक से जगमगा रहा है। रात होते ही रोशनी से सजे मंदिर और बाजार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।
बांकेबिहारी मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
वृंदावन के विश्वप्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के अलग-अलग राज्यों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचे हैं। मंदिर की ओर जाने वाले रास्तों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। बांकेबिहारी मंदिर के साथ ही प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर, राधारमण मंदिर, राधा वल्लभ मंदिर और अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर कान्हा के दर्शन कर रहे हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद
जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा-वृंदावन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रमुख मंदिरों के आसपास वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया गया है। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार भीड़ पर नजर रख रही हैं। सीसीटीवी कैमरों के जरिए प्रमुख स्थानों की निगरानी की जा रही है। मंदिरों के आसपास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।
हर तरफ सुनाई दे रहा ‘नंद के घर आनंद भयो’
जैसे-जैसे रात का समय नजदीक आ रहा है, श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता जा रहा है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और संकीर्तन का दौर जारी है। कहीं भक्त ‘राधे-राधे’ का जाप कर रहे हैं तो कहीं ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज रहे हैं। ब्रज में जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है। कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े स्थलों पर भी विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि से लेकर वृंदावन की गलियों तक हर तरफ भक्तिमय माहौल नजर आ रहा है।
रात 12 बजे का इंतजार कर रहे भक्त
श्रद्धालुओं की नजर अब उस पल पर टिकी है जब रात के 12 बजेंगे और मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की घोषणा होगी। जैसे ही जन्म का समय होगा, मंदिरों में शंख, घंटे और घड़ियाल बज उठेंगे। भगवान के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठेगा। जन्म के बाद बाल गोपाल को विशेष श्रृंगार कराया जाएगा और झूले में विराजमान कर भक्तों को दर्शन दिए जाएंगे। कई मंदिरों में भगवान को पालने में झुलाने की परंपरा भी निभाई जाएगी।
मथुरा की धरती पर एक बार फिर वही दृश्य जीवंत होने जा रहा है, जब लाखों भक्त अपने आराध्य के जन्मोत्सव में शामिल होकर कृष्ण भक्ति में सराबोर होंगे। जन्माष्टमी की रात जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, ब्रज की रौनक और भक्तों का उत्साह अपने चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।

