ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा, मंदिर की गरिमा और सेवा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब कई अहम बदलाव किए जाएंगे। बुधवार को हुई हाईपावर्ड कमेटी की बैठक में मंदिर की पूजा-पद्धति से लेकर कर्मचारियों की हाजिरी, भोग व्यवस्था और चढ़ावे तक कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक में तय किया गया कि अब श्रद्धालु ठाकुरजी को माला जगमोहन की ओर फेंककर अर्पित नहीं कर सकेंगे। इसी तरह जगमोहन से सेवायत भी माला आंगन की ओर फेंककर अर्पित नहीं करेंगे।
कमेटी का मानना है कि ठाकुरजी को अर्पित की जाने वाली माला विधिवत तरीके से चढ़ाई जानी चाहिए। माला फेंककर अर्पित करने की परंपरा के दौरान कई बार माला नीचे गिरकर ठाकुरजी के चरणों तक पहुंच जाती है। इसे मंदिर की गरिमा और पूजा की मर्यादा के अनुरूप नहीं माना गया। ऐसे में अब माला अर्पित करने की व्यवस्था को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है।
माला फेंककर चढ़ाने पर लगेगी रोक
बैठक में सबसे अहम चर्चा ठाकुरजी को माला अर्पित करने के तरीके को लेकर हुई। मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के दौरान अपने आराध्य को माला अर्पित करना चाहते हैं। अभी कई बार श्रद्धालु जगमोहन की तरफ से माला फेंककर ठाकुरजी को अर्पित करते हैं। दूसरी ओर सेवायत भी जगमोहन से आंगन की ओर माला फेंकते हैं। कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि इस तरह माला अर्पित करने से व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही फूलों की माला नीचे गिरने की स्थिति भी बनती है। ठाकुरजी के सामने अर्पित होने वाली सामग्री के साथ इस तरह की स्थिति मंदिर की धार्मिक गरिमा के अनुकूल नहीं है। इसलिए अब माला चढ़ाने के लिए विधिवत व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।
कर्मचारियों की हाजिरी होगी बायोमेट्रिक
मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। बैठक में कर्मचारियों की हाजिरी बायोमेट्रिक सिस्टम से कराने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की उपस्थिति का सही रिकॉर्ड रखना और ड्यूटी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना है। कमेटी की ओर से मंदिर में बारकोड लगाने को लेकर भी बैंकों से सहयोग करने के लिए कहा गया है। बारकोड व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर से जुड़ी कई प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भोग अर्पित करने की व्यवस्था में भी बदलाव
बैठक में ठाकुरजी के भोग को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए गए। तय किया गया कि रेलिंग के अंदर खड़े भोग भंडारी केवल सेवाधिकारी को ही भोग अर्पित करेंगे। भोग व्यवस्था के दौरान किसी तरह की अनियमितता न हो, इसके लिए जिम्मेदारियों को स्पष्ट रखने पर जोर दिया गया। कमेटी ने चढ़ावे को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। बैठक में साफ कहा गया कि चढ़ावे की रकम को किसी भी स्थिति में जेब में नहीं रखा जाएगा। यदि कोई श्रद्धालु दान या चढ़ावा देता है तो उसे निर्धारित दानपात्र में ही डाला जाएगा। इससे चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी और मंदिर की आय का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित तरीके से रखा जा सकेगा।
ठाकुरजी के भोग में इस्तेमाल होने वाले पेड़े की गुणवत्ता पर जोर
बैठक में ठाकुरजी के भोग में इस्तेमाल होने वाले पेड़ों की गुणवत्ता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। हाईपावर्ड कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार ने जिला प्रशासन से कहा कि ठाकुरजी के भोग के लिए अच्छी गुणवत्ता के पेड़े उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने बाजार में बिकने वाले कम गुणवत्ता वाले पेड़ों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि ठाकुरजी के भोग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। इसके लिए बाजार में बिक रहे पेड़ों की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने और खराब गुणवत्ता का सामान बेचने वालों पर अंकुश लगाने की जरूरत बताई गई।
मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की सुविधा पर रहेगा फोकस
हाईपावर्ड कमेटी की बैठक में लिए गए फैसलों से साफ है कि मंदिर प्रशासन अब सेवा व्यवस्था के साथ-साथ पारदर्शिता और धार्मिक मर्यादा पर भी विशेष ध्यान देने की तैयारी में है। माला अर्पित करने की व्यवस्था हो या भोग और चढ़ावे से जुड़े नियम, सभी व्यवस्थाओं को तय प्रक्रिया के तहत संचालित करने की कोशिश की जा रही है। बांकेबिहारी मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रखना बड़ी चुनौती भी है। कमेटी की ओर से लिए गए इन फैसलों का मकसद पूजा की मर्यादा बनाए रखने के साथ मंदिर की आंतरिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित करना बताया गया है।


