कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में अब सबकी नजर हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। मामले में हाई कोर्ट ने 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति वसूली पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश को मस्जिद पक्ष ने बड़ी राहत माना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले को लेकर कानूनी लड़ाई एक बार फिर अहम मोड़ पर पहुंच गई है।
एक तरफ मस्जिद पक्ष को हर्जाना वसूली पर रोक से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। शासकीय अधिवक्ता का कहना है कि अदालत में सुनवाई के बाद जो भी फैसला आएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन की ओर से इसे सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण माना गया था। इसी विवाद के बीच क्षतिपूर्ति के तौर पर 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की रकम की वसूली का मामला सामने आया था। हाई कोर्ट ने इस रकम की वसूली पर रोक लगा दी है। मस्जिद पक्ष के लिए इसे अहम राहत माना जा रहा है। हालांकि, इस रोक को मामले का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। अब अगली सुनवाई में अदालत इस पूरे विवाद से जुड़े पक्षों को सुन सकती है और आगे की स्थिति साफ हो सकती है।
कलेक्ट्रेट में सरकारी जमीन पर बनी इस मस्जिद को प्रशासन ने शनिवार, 5 सितंबर को ध्वस्त करा दिया था। प्रशासन की यह कार्रवाई 2 सितंबर को जिला जज न्यायालय की ओर से दिए गए आदेश के बाद हुई थी। मस्जिद को हटाए जाने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया था। कार्रवाई को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से प्रतिक्रियाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां क्षतिपूर्ति की वसूली के खिलाफ भी पक्ष रखा गया।
अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई को लेकर दोनों पक्षों की नजर हाई कोर्ट पर है। फिलहाल 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति वसूली पर रोक लगी हुई है। ऐसे में अगली सुनवाई में अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है, यह काफी अहम माना जा रहा है। मस्जिद पक्ष का कहना है कि हर्जाना वसूली पर रोक मिलना उसके लिए राहत की बात है। वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा। शासकीय अधिवक्ता ने भी स्पष्ट किया है कि सुनवाई के बाद अदालत जो निर्णय देगी, उसे स्वीकार किया जाएगा।
मामले में मस्जिद को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि क्षतिपूर्ति की रकम की वसूली पर हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई में इस मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। 12 अक्टूबर की सुनवाई इसलिए भी अहम होगी, क्योंकि इसी के बाद पता चलेगा कि 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति को लेकर आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है। सहारनपुर के इस चर्चित मामले में अब प्रशासन, मस्जिद पक्ष और स्थानीय लोगों की निगाहें हाई कोर्ट के अगले आदेश पर टिकी हैं।पड़ सकता है।


