चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग बीजिंग से रवाना होकर नई दिल्ली पहुंच गए हैं। करीब सात वर्षों बाद उनका भारत दौरा हो रहा है, इसलिए इस यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। वे BRICS Summit में शामिल होने के लिए भारत आए हैं, जिसकी मेजबानी भारत मंडपम, नई दिल्ली में हो रही है।
शी जिनपिंग से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम समेत कई अहम वैश्विक नेता नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस समिट में कुल 12 राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख और 17 अन्य उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं। इनके अलावा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा भी प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल हैं। इतने बड़े स्तर पर जुटाव इस बात का संकेत है कि यह समिट कूटनीतिक रूप से कितनी अहमियत रखता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे समिट की मेजबानी कर रहे हैं और इसके साथ-साथ कम से कम 15 द्विपक्षीय बैठकें भी करने वाले हैं। इन सभी बैठकों में सबसे ज्यादा चर्चा पीएम मोदी और शी जिनपिंग की आमने-सामने होने वाली मुलाकात की हो रही है। दोनों नेताओं की बातचीत में भारत-चीन संबंधों को स्थिर बनाने, वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच बढ़ते ट्रेड डेफिसिट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
यह मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 2020 के पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद से भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव बना रहा था। अब दोनों देश धीरे-धीरे रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में शी जिनपिंग का यह दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच भरोसा फिर से कायम करने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।


