आजमगढ़: यूपी के आजमगढ़ (Azamgarh) में घाघरा और मंगई नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है जिससे बाढ़ का संकट गहरा गया है। सगड़ी से लेकर मेंहनगर जहानागंज क्षेत्र तक पानी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक तरफ घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, तो दूसरी ओर मंगई नदी के उफान और तैयबपुर मौजा लपसीपुर के पास नहर कटने से खेतों से लेकर संपर्क मार्गों तक पानी का संकट गहराता जा रहा है। किसानों की खड़ी फसलें डूब रही हैं और ग्रामीणों के सामने आवागमन से लेकर पशुओं और रोजमर्रा की जिंदगी तक का संकट खड़ा हो गया है।
घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर
सगड़ी तहसील क्षेत्र के उत्तरी छोर से होकर बहने वाली घाघरा नदी का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। बुधवार को नदी का जलस्तर 71.28 मीटर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरा का स्तर 70.40 मीटर है। यानी नदी खतरे के निशान से 88 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है।
वहीं बदरहुआ में जलस्तर 72.03 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 71.68 मीटर से 35 सेंटीमीटर ऊपर है। जलस्तर बढ़ने का सीधा असर ग्रामीण इलाकों पर दिखाई दे रहा है। करीब एक दर्जन संपर्क मार्ग पानी में डूबने से आवागमन प्रभावित हुआ है।
सिर्फ नाव का सहारा
मानिकपुर, सोनौरा और इस्माइलपुर में आवागमन के लिए नाव संचालित की जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर अब भी लोगों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।
बेलहिया-सोनौरा मार्ग पर बच्चों के पानी पार कर विद्यालय जाने की तस्वीर ग्रामीण संकट की गंभीरता बयां कर रही है।
ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि कई स्थानों पर जरूरत के मुकाबले नावों की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है और नावों में अधिक लोगों के सवार होने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
किसानों की फसलें डूबीं
घाघरा के बढ़ते जलस्तर से बरामदपुर गांव चारों तरफ से पानी से घिर गया है। बरामदपुर और टेकनपुर के किसानों की धान और सब्जियों की फसलें पानी में डूब गई हैं. परसिया गांव में परवल की फसल डूबने से किसानों ने लाखों रुपये के नुकसान का दावा किया है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराए और पात्र प्रभावित किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
मेंहनगर में नहर बनी आफत
घाघरा नदी का पानी सगड़ी में कहर बरपा रहा है। उधर मंगई नदी का बढ़ता जलस्तर भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। नदी के आसपास के इलाकों में खेतों में पानी भरने से धान, बाजरा और पशुओं के चारे की फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है।
देवकली, मौलिया, रामघाट, दिलमनपुर, फिनिहिनी, सिंहपुर, रामपुर, कुढ़ापार, टोडरपुर, खुटहन, मुसवां, जमुवां और जियापुर उत्तरी समेत कई गांवों में जलभराव से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और मजदूरी में हजारों रुपये खर्च करने के बाद तैयार हुई फसल अब पानी में डूब रही है। यदि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा है।
रिपोर्ट: रमावतार उपाध्याय


