LucknowNews: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों से चोरी की गई रकम उनकी संपत्तियों से ही वसूली जाएगी। इसके लिए बीएनएसएस की धारा-107 के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले में कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता भी हो सकती है, जिन्होंने चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी की है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पहचान करने और नए संदिग्धों की तलाश में जुटी है। राम मंदिर में ट्रस्ट की जो रकम आरोपियों ने पार की है, वह उनसे ही रिकवर की जाएगी। नकद बरामदगी के अलावा आरोपियों की संपत्तियों के जरिये उसी की भरपाई होगी। यही वजह है कि पुलिस आरोपियों की उन संपत्तियों का ब्योरा जुटा रही है, जिनको चोरी की रकम के जरिये बनाया गया है। वहीं पुलिस की जांच में करीब पांच और गणनाकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। उनसे पूछताछ जारी है। सुबूतों की तस्दीक करने के बाद गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पहले गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपियों की संपत्तियों का जब्तीकरण किया जाता था। इस प्रक्रिया में लंबा वक्त लगता था। लेकिन बीएनएसएस की धारा-107 के तहत कड़ा प्रावधान किया गया है, जिसमें इस तरह के अपराध में अवैध व अपराध के जरिये अर्जित संपत्तियों से भरपाई करने का प्रावधान है। इस तरह की पहली कार्रवाई रायबरेली पुलिस ने की थी। इसी तरह की कार्रवाई अब अयोध्या पुलिस करेगी। पुलिस विवेचना के दौरान पूरा आकलन कर रही है कि आखिर ट्रस्ट की कितनी रकम और कितने का सोना-चांदी आदि आरोपियों ने पार किया। दूसरी तरफ आरोपियों की संपत्तियों का आकलन जारी है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि मंदिर से जुड़ने के बाद किसकी कितनी संपत्ति बढ़ी। अब तक की जांच में कई गुना संपत्ति बढ़ी पाई गई है। बहुत जल्द पुलिस इन संपत्तियों के जरिये ट्रस्ट के नुकसान की भरपाई करेगी।

चंदा चोरी मामले में बड़ा खुलासा कई और लोग भी शामिल, जांच में नए नाम सामने आए

जेल भेजे गए आरोपी व बैंक कर्मियों के अलावा कई और गणनाकर्मियों ने हाथ साफ किया है। इसी में पांच गणनाकर्मियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस की एक टीम ने बुधवार को उनसे लंबी पूछताछ की। इसके अलावा गणना कक्ष के बाहर तैनात रहने वाले निजी सुरक्षाकर्मियों से भी पूछताछ की गई। अब तक पुलिस 50 लोगों से अधिक पूछताछ कर चुकी है। 

ड्यूटी में गड़बड़ी का खुलासा लगातार एक ही तैनाती पर उठे सवाल

पुलिस, एसएसएफ, पीएसी और सीआरपीएफ की तैनाती मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में है। प्रत्येक 15 दिन में सभी अधिकारियों व जवानों के ड्यूटी प्वाइंट बदले जाते हैं, जिससे व्यवस्था पूरी तरह से दुरुस्त रहे। लेकिन गणना में ऐसा नहीं था। एक-दो साल से अधिकतर वही कर्मी गणना में लगे थे। क्योंकि ड्यूटी गणना इंचार्ज सुभाष व टिन्नू यादव लगाते थे। इसलिए हेरफेर होता रहा। निजी सुरक्षाकर्मियों की भूमिका जांची जा रही है।

कंट्रोल रूम प्रभारी आरएमओ अर्जुन देव 17 साल से अयोध्या में ही थे। चोरी का मामला उजागर हुआ, तब तीन दिन पहले वह रिलीव हुए। सूत्रों के मुताबिक, इतने लंबे समय तक तैनाती की वजह ट्रस्ट के पदाधिकारियों का पावर था। ट्रांसफर हुए, लेकिन हर बार रुकवा लिए गए। कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी उनकी ही थी। लिहाजा अब उनकी भूमिका जांची जा रही है। इसमें लापरवाही है या फिर मिलीभगत, इस पहलू पर तफ्तीश जारी है।
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