समाजवादी पार्टी की मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान, एनकाउंटर नीति और तमाम राजनीतिक मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने मोहन भागवत के भारत में मुसलमानों से जुड़े बयान पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका से लौटने के बाद भी भागवत अपने इसी विचार पर कायम रहेंगे। वहीं मुजफ्फरनगर एनकाउंटर मामले में सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को उन्होंने दोहरा रवैया करार दिया। सांसद का आरोप है कि सत्ता में बैठे लोग अपनी सुविधा के अनुसार कार्रवाई करते हैं, जिससे संविधान और लोकतंत्र दोनों को नुकसान पहुंच रहा है।
अमेरिका में मोहन भागवत के दिए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचि वीरा ने कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करेंगी कि भागवत भारत लौटने के बाद भी अपने इन्हीं विचारों पर टिके रहें और उन्हें अमल में भी लाएं। दूसरी ओर, मुजफ्फरनगर में अंकित बालियान हत्याकांड के आरोपियों के एनकाउंटर पर बोलते हुए उन्होंने सरकार की नीति को दोहरा रवैया बताया। उनका कहना था कि कहीं तुरंत कार्रवाई हो जाती है तो कहीं मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, और बड़े पदों पर बैठे लोगों को यह दोहरापन तुरंत छोड़ देना चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समाजवादी पार्टी को ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ कहे जाने पर रुचि वीरा ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को हर वक्त सिर्फ सपा ही दिखाई देती है और वे लगातार बेबुनियाद आरोप लगाते रहते हैं, जबकि खुद हर काम निजी एजेंसियों और अपने करीबियों को सौंप रहे हैं। चुनाव नजदीक आते ही उन्हें अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के आरक्षण को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि जो सरकार में रहकर भी अपनी बात नहीं मनवा पा रहे और उन्हें धरना-प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है, ऐसे गठबंधन का फायदा ही क्या है।
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मल्लिकार्जुन खड़गे मामले में राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर पर रुचि वीरा ने कहा कि देश में संविधान की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिन लोगों पर वास्तव में कार्रवाई होनी चाहिए, उन पर एफआईआर नहीं होती, जबकि जायज मांग उठाने वालों पर मुकदमे लाद दिए जाते हैं। उन्होंने इसे बाबा साहेब के समानता के सपने पर सीधा हमला बताया। साथ ही, एक आईएएस अधिकारी के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि कोई अधिकारी बड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद आईएएस बनता है, ऐसे में उसे इस्तीफा देने की नौबत तक पहुंचाने के पीछे जरूर सरकार का भारी दबाव रहा होगा।
रिपोर्ट- शारिक सिद्दकी/ सोनू सिंह


