लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) हर सरकारी कार्यक्रम और जनसभा में यूपी में बेहतर कानून-व्यवस्था को अपनी उपलब्धि के तौर पर गिनाते हैं। लेकिन ऐसा लगता है इन दावों पर सरकार के मंत्रियों और विधायक को ही भरोसा नहीं है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि एक तरफ योगी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वहीं दूसरी तरफ आगरा के फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक बाबूलाल चौधरी ने अपनी ही सरकार में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीतापुर में तो नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर पुलिस प्रशासन पर अनदेखी करने और कहने के बाद भी काम नहीं करने का आरोप लगाते हुए रोने तक लगे।
सपा नेता के साथ धरने पर बैठे मंत्री संजय निषाद
ऐसे में यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि कहीं यूपी के चुनावी मौसम को देखते हुए ये राजनीतिक हवा तो नहीं बदल रही है। सबसे पहले बात करते हैं निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद की जो गोंडा में कारोबारी विनोद कुमार साहनी की हत्या के बाद सपा कार्यकर्ताओं के साथ इसके विरोध में धरने पर बैठ गए। संजय निषाद और समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप ने धरना देकर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की।
इस दौरान संजय निषाद पुलिस-प्रशासन से भी बेहद खफा नजर आए और कहा, ‘इतनी फोर्स क्यों लगाई है? ऐसा लगता है कि हमारे लोग अंग्रेजों के समय गुंडे-कातिल थे। आप सरकार की छवि क्यों खराब कर रहे हैं? ये फोर्स आरोपियों के घर पर लगाओ, ताकि वहां कोई आगजनी न हो और विरोधी लोग वहां कुछ न कर पाएं। इसे निषाद के प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर भी देखा जा रहा है।
बीजेपी विधायक ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
अब बात करते हैं फतेहपुर सीकरी से बीजेपी विधायक बाबूलाल चौधरी की जो इन दिनों अपनी ही सरकार और प्रशासन से खफा चल रहे हैं। बाबूलाल ने पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाए हैं और 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को शिकायती चिट्ठी भी लिखी है।
इतना ही नहीं फतेहपुर सीकरी के विधायक का आरोप है कि पुलिसकर्मी बिना पैसा लिए आम लोगों का कोई काम नहीं करते और थाने-चौकियों पर जाने वाले पीड़ित उनके रवैये से परेशान रहते हैं।
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उन्होंने पुलिस आयुक्त से उन आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की भी मांग की है। उन्होंने ये भी कहा कि बिना पैसे दिए एक काम नहीं होता और कुछ दारोगा भ्रष्टाचार को चोला ओढ़े हुए हैं।
अफसरों के रवैये से रोने लगे राज्यमंत्री राकेश राठौर
यूपी के पुलिस-प्रशासन से सिर्फ यही दोनों नहीं बल्कि योगी सरकार में राज्यमंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’ भी बेहद परेशान हैं और उन्होंने भी मोर्चा खोल दिया है। दरअसल राकेश राठौर गुरुवार को देर रात सीतापुर के कोतवाली गेट पर खड़े थे और उनके आखों से आंसू की धार बह रही थी। उन्होंने रोते हुए भारी आवाज में कहा अफसर उनके बातों की अनदेखी करते हैं।
दरअसल अतिक्रमण हटाए जाने के विरोध को लेकर पुलिस ने कुछ स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था जिसे छुड़ाने के लिए मंत्री राकेश राठौर पहुंचे थे।
उन्होंने दावा किया कि इस दौरान डीएम, एसपी और कोतवाल को फोन किया लेकिन किसी ने उनकी बात तक नहीं सुनी और इसी वजह से लखनऊ से जरूरी काम छोड़कर उन्हें सीतापुर आना पड़ा। मंत्री पुलिस की कार्रवाई से लेकर अफसरों के व्यवहार पर बुरी तरह भड़के हुए नजर आए।
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ऐसे में सवाल उठे रहे हैं कि सीएम योगी जिस कानून-व्यवस्था को यूपी में अपनी उपलब्धि के तौर पर गिनाते हैं क्या उसकी वजह से राज्य में अफसरशाही इतनी हावी हो गई है कि चुनी हुई सरकार के मंत्री भी उनके व्यवहार को लेकर अब सवाल खड़े करने लगे हैं।
रिपोर्ट: कुणाल कौशल


